ऐसे संस्थान जहां सिर्फ रविवार को होती है पढ़ाई

छात्रों के विदाई कार्यक्रम का हुआ आयोजन



आवाज़ ए हिंद टाइम्स सवांदाता, नई दिल्ली, अप्रैल। नॉन कॉलेजिएट वीमेंस एजुकेशन बोर्ड, अरबिंदो कॉलेज सेंटर ने रविवार को डिग्री प्रोग्राम के तीन वर्ष पूरे होने पर बीए (प्रोग्राम) और बीकॉम (प्रोग्राम) की छात्राओं के लिए पहला विदाई समारोह का आयोजन किया गया।


विदाई समारोह के अवसर पर सेंटरकी स्थापना के समय से जुड़े शिक्षकों को भी आमंत्रित किया गया था। इस अवसर पर 7 शिक्षकों को उनकी उपलब्धि और सक्रिय रचनात्मक कार्यों के लिए उन्हें वाग्देवी के स्मृति चिन्ह और उपहार स्वरूप वस्तुएं भेंट की गई।


सम्मानित किए गए शिक्षकों में डॉ. प्रदीप कुमार सिंह, डॉ. नंदकिशोर मंडल, डॉ. रोशन लाल, डॉ. मधुश्मिता, डॉ. रेनू, डॉ. गुनीत गिल व डॉ. राजीव कुमार षामिल है। सेंटर प्रभारी प्रो. हंसराज सुमन ने विदाई समारोह में छात्राओं को बधाई और आशीर्वाद देते हुए कहा कि वे परीक्षा में अव्वल आएं, परिवार, राष्ट्र और अपने सेंटर का नाम रोशन करे।


उन्होंने भारी समूह को संबोधित करते हुए कहा नॉन कॉलेजिएट सरकारी शिक्षा पद्धति की व्यवस्था में एक बेहतर विकल्प के रूप में सामने आया है, जहां केवल रविवार के दिन पढ़ाई होती है और शिक्षकों को 50 दिनों में अपना सलेब्स पूरा कराना पड़ता है, बावजूद इसके नॉन कॉलेजिएट की छात्राओं के परीक्षा परिणाम रेगुलर कॉलेजों से बेहतर चरिणाम गलर कॉलेजों से बेहतर आ रहे हैं।


यह सब कशल नेतृत्व और हमारे योग्य, शिक्षकों की मेहनत का परिणाम है कि हम सभी सेंटर में अध्यापन, सांस्कृतिक कार्यक्रमों, खेलकूद , भाषण प्रतियोगिता, गीत स प्रतियोगिता, गीत संगीत, नृत्य, कला साहित्य आदि के क्षेत्र में छात्राओं ने बेहतर प्रदर्शन कर सेंटर का नाम रोशन किया है।


सुमन ने अपने संबोधन में आगे बताया कि डीयू में सर्वाधिक कम कट ऑफ पर प्रवेश देने वाले इस सेंटर ने सबसे बेहतर परीक्षा परिणाम दिए हैं। उन्होंने बताया कि कुछ छात्राओं ने रेगुलर की छात्राओं से अधिक अंक हासिल करके केंद्र की मेरिट को प्रमाणित कर दिया है।


ऐसे गुणवत्तापूर्ण सक्रिय शैक्षणिक संस्थान देश को शिक्षा व्यवस्था की आधार भूत सोच को जहां आगे बढ़ाते हैं वहीं इस ओर कमतर ध्यान दिए जाने वाले सरकारी तंत्र की लापरवाही और ना समझदारी की पोल भी खोलते हैं।


प्रो. समन ने कहा कि महिलाओं को शिक्षा जितनी आवश्यक है उतनी और कुछ नहीं, यदि वे शिक्षित होती हैं तो राष्ट्र शिक्षित होगा, आधी आबादी की अशिक्षा पूरी आबादी को प्रभावित करती।


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