समिति बनेगी एक देश एक चुनाव पर

प्रधानमंत्री मोदी की बैठक से किया
किनारा 40 में से 21 दलों ने 



आवाज़ ए हिंद टाइम्स सवांदाता, नई दिल्ली, जून। लोकसभा और विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने के विषय पर विस्तृत अध्ययन के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एक समिति गठित करेंगे। यह निर्णय श्री मोदी की अध्यक्षता में आज यहां हुई विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रमुखों नेताओं की बैठक में लिया गया।


रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने करीब चार घंटे चली बैठक के बाद संवाददाताओं को बताया कि इसमें ज्यादातर दलों ने देश में सभी चुनाव एक साथ कराने के मुद्दे का समर्थन किया। केवल माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी तथा भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने यह सवाल उठाया है कि यह कैसे होगा और इसका तरीका क्या होगा।


वैसे इन दोनों दलों ने भी इस मुद्दे का विरोध नहीं किया। समिति की रिपोर्ट के आधार पर कदम उठाया जाएगासिंह ने कहा कि यह समिति निर्धारित समय-सीमा में अपनी रिपोर्ट देगी और उसके आधार पर आगे कदम उठाया जाएगा। उन्होंने कहा  कि यह मिली-जुली समिति होगी।


सरकार ने संसद में प्रतिनिधित्व वाले 40 दलों के प्रमुखों को बैठक के लिए आमंत्रित किया था जिनमें से 21 ने बैठक में हिस्सा लिया और तीन दलों ने अपनी राय लिखित में भेजी है। शिव सेना व अनादमक भी रहे बैठक से दूर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, द्रमुक, समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी, आम आदमी पार्टी, देशम पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल तथा जनता दल एस बैठक में हिस्सा नहीं वाले दलों में शामिल हैं।


इसके अलावा राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के घटक दल शिव सेना और अन्नाद्रमुक ने भी इसमें भाग नहीं लिया। यह बैठक प्रधानमंत्री ने एक देश एक चुनाव, संसद के दोनों सदनों में ज्यादा से ज्यादा कामकाज किए जाने, आजादी के 75 वें वर्ष में नए भारत के निर्माण, राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150वीं जयंती से संबंधित समारोह तथा आकांक्षी जिलों के विकास के मुद्दों पर विचार विमर्श के लिए बुलायी थी।


कृषि संकट, बेरोजगारी, महंगाई पर चर्चा करे सरकारः कांग्रेस मामले पर कांग्रेस का कहना है कि देश की खस्ताहाल अर्थव्यवस्था, कृषि संकट, बेरोजगारी, महंगाई व बिहार में बच्चों की मौत जैसे मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए यह मुद्दा उछाला गया है। पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी ने सरकार को पत्र भेजे पत्र में खेद व्यक्त करते हुए शामिल नहीं होंगे।


उधर मायावती ने भी इसे छलावा करार देते हुए कहा है कि यदि ईवीएम के प्रति जनता के अविश्वास को लेकर यह बैठक बुलाई गई होती वे इसमें अवश्य शामिल होतीं। बुधवार को सुबह अचानक इन दलों ने प्रधानमंत्री की बैठक में शामिल होने मना कर दिया। मायावती ने ट्वीट कर कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक देश में चुनाव कभी कोई समस्या नहीं हो सकता हैऔर न ही चुनाव को कभी धन के व्यय-अपव्य से तौलना उचित है।


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